छत्तीसगढ़

अबूझमाड़ के दुर्गम जंगलों में पहुंची स्वास्थ्य सेवाएं

 नियद नेल्लानार योजना के तहत 4 जगह लगे हेल्थ कैंप

नारायणपुर: जिले के सबसे दुर्गम और घने जंगलों वाले इलाकों में भी अब स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचने लगी है. राज्य सरकार की नियद नेल्लानार योजना के तहत 22 नवम्बर को चार ग्रामीण अंचलों कस्तुरमेटा, बेडमाकोटी, कुतुलनार और ईरकभट्टी में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए. सालों से बुनियादी इलाज, जांच और विशेषज्ञ डॉक्टरों से वंचित इन गांवों के लोगों ने इस शिविर का लाभ उठाया.

सरकार और प्रशासन की संयुक्त पहल: राज्य सरकार प्रदेश के सबसे दूरस्थ हिस्सों में भी स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने की पहल कर रही है. वहीं प्रशासन की ओर से कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कुंवर ने भी इस पहल को जमीनी स्तर तक पहुंचाया और 4 जगह शिविर लगे. शिविरों में हजारों की संख्या में ग्रामीणों ने हिस्सा लिया. विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में ग्रामीणों को मुफ्त इलाज और दवाएं भी दी गई.

चार सुदूर गांवों में एक साथ स्वास्थ्य शिविर

कस्तुरमेटा पुलिस थाना इलाके के ग्राम आकाबेडा क्षेत्र, आईटीबीपी 53वीं वाहिनी कैंप में शिविर लगा
पुलिस थाना कोहकामेटा क्षेत्र के बेड़माकोटि में आईटीबीपी 41वीं वाहिनी कैंप परिसर में शिविर लगाया गया.
पुलिस थाना सोनपुर क्षेत्र के ग्राम कांदुलनार के बीएसएफ 133वीं वाहिनी कैंप में स्वास्थ्य शिविर आयोजित
पुलिस थाना कोहकामेटा क्षेत्र, ईरकभट्टी के बीएसएफ 135वीं वाहिनी कैंप में भी आयोजन
Niyyad Nellanar Scheme
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम पहुँची जंगलों में: शिविरों में नारायणपुर, कोण्डागांव, कांकेर और रायपुर से विशेषज्ञ डॉक्टर पहुंचे.

डॉ. हिमांशु सिन्हा, डॉ. धनराज सिंह, डॉ. जितेन्द्र दुग्गा, डॉ. वेदांत बघेल, नारायणपुर
डॉ. अविनाश, डॉ. धीरेन्द्र, रायपुर
डॉ. कुमुत खरे, कोण्डागांव
डॉ. रविन्द्र वट्टी, डॉ. कुमार सानू साहू, कांकेर

निशुल्क जांच, उपचार और आयुष्मान कार्ड पंजीयन: शिविरों में सबसे बड़ी राहत यह रही कि ग्रामीणों को रक्तचाप, मधुमेह, हीमोग्लोबिन सहित आवश्यक जांच मिली. साथ ही जिन ग्रामीणों के आयुष्मान कार्ड नहीं बने थे, उनका पंजीयन वहीं पर किया गया.

ग्रामीणों में उत्साह: लंबे समय बाद अपने ही गांव में विशेषज्ञ डॉक्टरों को देखकर ग्रामीणों में उत्साह साफ झलक रहा था. कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में अब स्वास्थ्य सुविधाएं सीधे गांव तक पहुंच रही हैं.

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