भरी बरसात में झरिया के जरिए ग्रामीण बुझा रहा हैं प्यास…
प्रशासनिक अकर्मण्यता की निशानी बना टंकी


मोहला-मानपुर। जल जीवन मिशन के जरिए हर घर को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के दावों के बीच मोहला-मानपुर जिले में एक ऐसा गांव भी है, जहां जल जीवन मिशन के तहत बना टंकी टॉवर बिना किसी काम के बुत बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण भरी बरसात में नदी में झरिया बनाकर अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं.
ये गांव है मानपुर विकासखंड का पिट्टेमेटा! कभी नक्सलियों का गढ़ रहे इस महाराष्ट्र सीमावर्ती गांव के बाशिंदों को नक्सलवाद से मुक्ति तो मिल गई, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता और अनदेखी के चलते उपजा अभागापन आज भी इनका पीछा नहीं छोड़ रहा. यही वजह है कि एक ओर जहां बारिश में लोग तर-बतर हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इस गांव के बाशिंदे पीने के पानी के लिए जद्दोजहद करने को मजबूर हैं.
दरअसल, गांव में जल जीवन मिशन का पेयजल आपूर्ति कार्य पिछले करीब दो साल से अधूरा है. न तो घर-घर तक पाइप लाइन के जरिए पेयजल पहुंचाने का काम पूरा हो सका है, और न ही पाइप लाइन का बेहतर विस्तार हो पाया है. जल जीवन मिशन के नाम पर केवल पानी टंकी से युक्त टावर खड़ा कर दिया गया है, जो निर्माण के बाद कुछ समय तक घर-घर तो न सही.
अलबत्ता टावर के नीचे टावर में लगे पाइप के जरिए पानी देकर ग्रामीणों के पेयजल का आधार जरूर बना रहा. लेकिन पाइप लाइन विस्तार के नाम पर जो पाइप लाइने गांव में जमीन खोदकर बिछाई गई. वो पाइप लाइन कुछ ही समय में जगह-जगह लीकेज हो गया, जिससे टंकी में सूखा पड़ा हुआ है.
गांव में जल जीवन मिशन के तहत पूर्व से सोलर सिस्टम वाली एक छोटी सी टंकी वाली वर्षों पुरानी लाचार पेयजल व्यवस्था जरूर है, लेकिन उक्त टंकी में भी न तो पानी का पर्याप्त भंडारण हो पाता है, और न ही इस टंकी के नीचे लगी नल पर्याप्त पानी उगल पाती हैं, जिस हैंडपंप से ये पुराना टंकी जुदा है वो हैंडपंप भी टूट फूट कर लीकेज हो रहा है. ऐसे में नल के जरिए बूंद-बूंद टपकते पानी से घंटों खड़ा रहकर अपना छोटा सा मर्तबान भरना भी किसी जंग से कम नहीं है. लिहाजा, ग्रामीण नदी के पानी को ही अपनी प्यास बुझाने का आधार बना रखे हैं.
एक ओर गांव के मुखिया ग्राम पटेल अपने गांव के बाशिंदों को पेयजल त्रासदी से निजात दिलाने की गुहार शासन-प्रशासन से लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जल जीवन मिशन के जिम्मेदार अफसर अभी उस कार्रवाई की दुहाई देकर जवाबदेही से बचने का प्रयास करते दिख रहे हैं. इन सबकी रस्साकसी के बीच ग्रामीण फिलहाल, नदी के झरिया से अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं.



