छत्तीसगढ़

खुद बच्ची बन गईं वर्णिका शर्मा, बच्चों संग खेला लूडो, हंसी के साथ सिखाया जिंदगी का पाठ

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा बच्चों के बीच पहुंची

  • छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा बच्चों के बीच पहुंची

रायपुर: कहते हैं, बच्चों का दिल जीतना हो तो पहले खुद बच्चा बनना पड़ता है. कुछ ऐसा ही नजारा आरंग के बोहरडीह में देखने को मिला, जहां छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा अपनी पहचान और पद से ऊपर उठकर बच्चों की टोली में शामिल हो गईं.

कभी लूडो की गोटी चली, कभी बच्चों की खिलखिलाहट गूंजी, तो कभी गीतों की महफिल सज गई. हंसी-मजाक के इसी खुशनुमा माहौल में उन्होंने बच्चों को गुड टच-बैड टच, आत्मरक्षा, बाल अधिकार और अच्छे संस्कारों का पाठ भी पढ़ाया. खास बात यह रही कि सोशल मीडिया पर गांव में बाल चौपाल लगाने की एक अपील ने इस पूरे आयोजन को हकीकत में बदल दिया.

गांव पहुंच गई बाल चौपाल
एक सोशल मीडिया पोस्ट,एक छोटी-सी अपील, और सीधे गांव पहुंच गई बाल चौपाल. ग्राम बोहरडीह के रूपचंद बंजारे ने अपने गांव में बाल चौपाल आयोजित करने का आग्रह किया था. डॉ. वर्णिका शर्मा ने इस आग्रह को तुरंत स्वीकार किया और गांव पहुंचकर यह साबित कर दिया कि बच्चों की आवाज अगर सच्ची हो, तो वह सीधे जिम्मेदारों तक पहुंचती है.

यहां मंच से भाषण कम और बच्चों के बीच अपनापन ज्यादा नजर आया. डॉ. वर्णिका शर्मा बच्चों के बीच में पहुंच गई, लूडो खेला, ठहाके लगाए,बच्चों के गीत सुने, उनके अनुभव सुने और खूब हंसी-मजाक किया. उन्होंने बच्चों से मुस्कुराते हुए कहा अगर मेरे बच्चों को खुश रहने से कोई भी चीज रोकती है, तो मुझे जरूर बताना. कुछ भी चाहिए हो तो बेझिझक कहना,बिल्कुल शर्माना मत.

मस्ती के बीच सीख भी कम नहीं थी. बच्चों को गुड टच-बैड टच, व्यक्तिगत सुरक्षा, बाल विवाह, बाल श्रम, आत्मरक्षा और उनके अधिकारों के बारे में बेहद आसान भाषा में समझाया गया. साथ ही यह भरोसा भी दिलाया गया कि किसी भी परेशानी में डरना नहीं, अपने माता-पिता, शिक्षकों या फिर 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन पर तुरंत जानकारी देनी है.

कार्यक्रम का सबसे भावुक पल तब आया, जब एक बच्ची ने अपने साथ हुई एक घटना का जिक्र किया. डॉ. वर्णिका शर्मा ने उसका मनोबल बढ़ाया और कहा कि चुप रहना नहीं, बोलना ही बहादुरी है. उस बच्ची का साहस वहां बैठे हर बच्चे के लिए प्रेरणा बन गया.

बच्चों ने बताई परेशानी, मौके पर हुई कार्रवाई
बाल चौपाल में बच्चों ने गांव के मिडिल स्कूल में शौचालय और स्थायी पेयजल व्यवस्था नहीं होने की समस्या भी रखी. डॉ. वर्णिका शर्मा ने इसे बच्चों के अधिकारों का मुद्दा मानते हुए तुरंत प्रकरण दर्ज कराया और संबंधित शिक्षा अधिकारियों को आयोग के समक्ष जवाब पेश करने के निर्देश दिए.

गीत, मुस्कान और तालियों से गूंज उठी चौपाल
किसी बच्चे ने गीत सुनाया, किसी ने अपने अनुभव साझा किए,तो अभिभावक भी बच्चों के साथ खुलकर मस्ती करते नजर आए. बारिश के बावजूद पूरे कार्यक्रम में उत्साह ऐसा था कि हर चेहरा मुस्कुरा रहा था और बाल चौपाल किसी उत्सव जैसी नजर आ रही थी.

पढ़ाई, संस्कार और सपनों की सीख
इस मौके पर प्रतियोगी परीक्षा विशेषज्ञ मुरली मनोहर ने बच्चों को पढ़ाई में एकाग्रता और सफलता के आसान मंत्र बताए. वहीं डॉ. वर्णिका शर्मा ने बच्चों से कहा कि माता-पिता और शिक्षक अपना कर्तव्य निभाते हैं, अब बच्चों की जिम्मेदारी है कि वे मन लगाकर पढ़ें, अच्छे संस्कार अपनाएं और अपने सपनों को साकार करें. बोहरडीह की यह बाल चौपाल सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं रही,यह बच्चों की मुस्कान, भरोसे, हिम्मत और सपनों की चौपाल बन गई,जहां अध्यक्ष की पहचान पीछे छूट गई और बच्चों की ‘वर्णिका दीदी’ सबसे आगे नजर आईं.

Related Articles

Back to top button