छत्तीसगढ़

दूसरों के जीवन में रंग भरने वाले राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता दिव्यांग कलाकार की अपनी जरूरी मांग अधूरी

95% दिव्यांग फिर भी हौसला बुलंद, चित्रकार बसंत साहू को अब भी इलेक्ट्रॉनिक व्हीलचेयर का इंतजार, शासन को भेजा गया प्रस्ताव

धमतरी: जिले के कुरूद निवासी राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित दिव्यांग चित्रकार बसंत साहू कई दिव्यांग बच्चों की जिंदगी में रंग भर रहे हैं. वे अनेकों स्कूली बच्चों और अपने जैसे 80 से 90 प्रतिशत तक दिव्यांग बच्चों को चित्रकारी सिखा रहे हैं. लेकिन उनकी अपनी जरूरी मांग करीब 30 सालों से अधूरी है. गई आवेदनों के बाद भी उन्हें सिर्फ इंतजार ही मिला है. देखिए हमारी खास रिपोर्ट

सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट
दिव्यांग चित्रकार बसंत साहू ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट लिखकर अपनी पीड़ा साझा की है. उन्होंने 1996 के पहले कलेक्टर और 2026 के वर्तमान कलेक्टर की तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि पिछले 30 वर्षों में उन्होंने कई आवेदन दिए, लेकिन आज तक उन्हें उनकी जरूरत के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक व्हीलचेयर नहीं मिल सकी. उनकी पोस्ट अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है.

दिव्यांग चित्रकार बसंत साहू ने जाहिर की पीड़ा (ETV BHARAT)
सड़क हादसे के बाद बदली जिंदगी
दरअसल, 15 सितंबर 1995 को हुए सड़क हादसे में बसंत साहू की रीढ़ की हड्डी गंभीर रूप से घायल हो गई. इसके बाद वे 95 प्रतिशत तक दिव्यांग हो गए. डॉक्टरों ने उम्मीद छोड़ दी, लेकिन बसंत ने हार नहीं मानी. बिस्तर पर लेटे-लेटे उन्होंने चित्र बनाना शुरू किया और बिना किसी प्रशिक्षण के एक बेहतरीन चित्रकार बन गए.

देश-विदेश तक पहुंची पहचान
बसंत साहू की पेंटिंग आज देश ही नहीं, विदेशों तक पहुंच चुकी हैं. उन्होंने अपनी कला के जरिए बस्तर की संस्कृति और छत्तीसगढ़ की लोककला को नई पहचान दिलाई. उनके योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है.

दिव्यांग बच्चों के लिए बने प्रेरणा
कुरूद स्थित बसंत फाउंडेशन में वे कई दिव्यांग और स्कूली बच्चों को मुफ्त में चित्रकारी सिखाते हैं. यहां बच्चे अपने हाथों या पैरों से पेंटिंग बनाना सीखते हैं. उनके कई छात्र आज खैरागढ़ कला विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे हैं.

Disabled Artist Basant Sahu story
30 साल से एक ही मांग
बसंत साहू का कहना है कि उन्होंने 1996 से लेकर 2026 तक हर कलेक्टर को आवेदन दिया. उनकी मांग है कि उन्हें उनकी जरूरत के अनुसार एक इलेक्ट्रॉनिक व्हीलचेयर और पेंशन समेत कुछ बुनियादी सुविधाएं मिल सके. क्योंकि उन्हें केयर टेकर रखना जरूरी होता है.

कलेक्टर ने क्या कहा?
धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने बताया कि बसंत साहू को सामान्य ट्राइसाइकिल नहीं, बल्कि विशेष इलेक्ट्रॉनिक व्हीलचेयर या ट्राइसाइकिल की जरूरत है. इसकी कीमत अधिक है और यह नियमित सरकारी योजना में शामिल नहीं है.

इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा गया है. फंड मंजूर होने पर उन्हें यह सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा.- अबिनाश मिश्रा, कलेक्टर

जो कलाकार वर्षों से दिव्यांग बच्चों के जीवन में आत्मविश्वास और उम्मीद के रंग भर रहा है, वह खुद अपनी एक बुनियादी जरूरत के लिए तीन दशक से इंतजार कर रहा है. अब देखना होगा कि शासन से फंड मिलने के बाद बसंत साहू का यह लंबा इंतजार कब खत्म होता है.

Related Articles

Back to top button