बारनवापारा अभयारण्य में पहली बार बर्ड सर्वे 2026
12 राज्यों की भागीदारी, छत्तीसगढ़ सबसे आगे
बलौदाबाजार: छत्तीसगढ़ के जंगल अब केवल शेर, तेंदुए या हिरणों की वजह से चर्चा में नहीं हैं, बल्कि अब पंखों वाली दुनिया भी इन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में आगे बढ़ रही है. बलौदाबाजार जिले में स्थित बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में पहली बार बर्ड सर्वे 2026 आयोजित होने जा रहा है, जो 16 से 18 जनवरी 2026 तक चलेगा.
बर्ड सर्वे के लिए देशभर से मिले इतने आवेदन
यह आयोजन केवल एक सर्वे नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में पक्षी संरक्षण, नागरिक विज्ञान और इको-टूरिज्म के नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है. इस सर्वे को लेकर देशभर में जिस तरह का उत्साह देखने को मिला है, उसने वन विभाग और प्रकृति प्रेमियों दोनों को चौंका दिया है. बलौदाबाजार DFO गणवीर धम्मशील ने बताया कि पंजीकरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद देश के विभिन्न हिस्सों से कुल 196 आवेदन मिले थे जिनमें से चयन प्रक्रिया के बाद 80 प्रतिभागियों को अंतिम रूप से सर्वे के लिए चुना गया है.
अब तक बारनवापारा अभयारण्य में बटरफ्लाई मीट जैसे आयोजन लगातार होते रहे हैं, जिनके जरिए तितलियों की प्रजातियों पर अध्ययन किया जाता रहा है. लेकिन पक्षियों पर केंद्रित यह पहला औपचारिक और राष्ट्रीय स्तर का सर्वे है, जो बारनवापारा के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. यह तथ्य अपने आप में महत्वपूर्ण है कि देशभर से आए इतने ज्यादा आवेदन यह संकेत देते हैं कि बारनवापारा अब केवल एक अभयारण्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर का बर्डिंग हॉटस्पॉट (ऐसे स्थान जहां पक्षियां की कई प्रजातियां मिलती है) बनता जा रहा है.
चयनित 80 प्रतिभागियों में 36 प्रतिभागी छत्तीसगढ़ से हैं, जो यह दर्शाता है कि राज्य के भीतर भी बर्ड वॉचिंग और प्रकृति अध्ययन के प्रति रुचि तेजी से बढ़ रही है. वहीं बाकी प्रतिभागी देश के 12 अन्य राज्यों से आ रहे हैं. विविध भौगोलिक और पारिस्थितिक पृष्ठभूमि से आए ये प्रतिभागी सर्वे को वैज्ञानिक दृष्टि से और भी समृद्ध बनाएंगे.
महाराष्ट्र – 14
मध्य प्रदेश – 8
तेलंगाना – 7
कर्नाटक – 5
बिहार – 3
गुजरात – 3
ओडिशा – 2
उत्तर प्रदेश – 2
पश्चिम बंगाल – 2
राजस्थान – 1
दिल्ली – 1
आंध्र प्रदेश – 1
केरल – 1
वनमण्डलाधिकारी का स्पष्ट संदेश
वनमण्डलाधिकारी बलौदाबाजार गणवीर धम्मसील ने ETV भारत को इस आयोजन को अभयारण्य के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा —”बारनवापारा सेंट्रल छत्तीसगढ़ की जैव विविधता का प्रतिनिधित्व करता है. यहां मिश्रित एवं साल वन, घासभूमियां और जल स्रोत मिलकर एक समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र बनाते हैं. इस बर्ड सर्वे से प्राप्त डेटा आगे चलकर अभयारण्य की प्रबंधन योजनाओं को बेहतर बनाने में सहायक होगा. खासतौर पर उन पक्षी प्रजातियों के संरक्षण में, जिनकी संख्या में गिरावट देखी जा रही है. यह आयोजन संरक्षण और इको-पर्यटन, दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.”
बारनवापारा: पक्षियों का सुरक्षित आशियाना
बहुत कम लोग जानते हैं कि बारनवापारा अभयारण्य केवल बड़े वन्यजीवों के लिए ही नहीं, बल्कि पक्षियों की सैकड़ों प्रजातियों के लिए भी सुरक्षित आवास है. यहां का पक्षी विहार, घासभूमियां, जलाशय, साल वन और मिश्रित वन संरचना इसे पक्षी अध्ययन के लिए आदर्श बनाते हैं. यहां स्थानीय और प्रवासी दोनों तरह के पक्षी पाए जाते हैं. जलाशयों के आसपास जलपक्षी, खुले मैदानों में घासभूमि से जुड़े पक्षी और घने वनों में रहने वाली दुर्लभ प्रजातियां बारनवापारा को एक संपूर्ण बर्डिंग लैंडस्केप बनाती हैं.
सर्वे का उद्देश्य: गिनती नहीं, भविष्य की योजना
बर्ड सर्वे 2026 का उद्देश्य केवल यह जानना नहीं है कि बारनवापारा में कितनी पक्षी प्रजातियां हैं, बल्कि इसका असली मकसद है-
पक्षी विविधता का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण
स्थानीय स्तर पर एकत्र किए गए डेटा को वैश्विक मंच से जोड़ना
घटती या दुर्लभ प्रजातियों की पहचान
संरक्षण रणनीतियों के लिए ठोस आधार तैयार करना
स्थानीय समुदायों और युवाओं को संरक्षण से जोड़ना
यह सर्वे नागरिक विज्ञान यानी Citizen Science की भावना पर आधारित है, जहां विशेषज्ञ और सामान्य प्रकृति प्रेमी मिलकर संरक्षण की दिशा में काम करते हैं.
तीन दिन, जंगल में गहराई से सीखने का अनुभव
16 से 18 जनवरी 2026 तक चलने वाले इस तीन दिवसीय आयोजन में प्रतिभागियों को केवल जंगल भ्रमण तक सीमित नहीं रखा जाएगा. उन्हें व्यावहारिक रूप से कई महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिनमें शामिल हैं —
फील्ड सर्वे तकनीक
पक्षी प्रजातियों की पहचान
कॉल और व्यवहार के आधार पर पहचान
डेटा संग्रह और विश्लेषण
eBird प्लेटफॉर्म पर रिकॉर्डिंग
संरक्षण सिद्धांत और उनके व्यावहारिक पहलू
इस सर्वे का आयोजन Birds & Wildlife of Chhattisgarh के सहयोग से किया जा रहा है और eBird का तकनीकी समर्थन इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर से जोड़ता है.
स्थानीय डेटा, वैश्विक मंच पर
इस सर्वे में एकत्र किया गया प्रत्येक डेटा eBird जैसे वैश्विक डाटाबेस का हिस्सा बनेगा. इसका सीधा फायदा यह होगा कि बारनवापारा की पक्षी विविधता को अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ता, संरक्षण एजेंसियां और नीति निर्माता भी देख और समझ सकेंगे. यह डेटा भविष्य में वन प्रबंधन योजनाओं, जैव विविधता संरक्षण रणनीतियों, शोध परियोजनाओं, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण आधार बनेगा.
बर्डिंग कल्चर और इको-टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आयोजन बर्डिंग कल्चर को बढ़ावा देते हैं. बर्ड वॉचिंग केवल एक शौक नहीं, बल्कि पर्यावरण शिक्षा, संरक्षण और रोजगार से भी जुड़ा हुआ है. बारनवापारा जैसे क्षेत्रों में बर्डिंग के बढ़ते अवसर स्थानीय गाइडों को रोजगार, होमस्टे और इको-रिसॉर्ट्स को बढ़ावा, युवाओं को प्रकृति आधारित करियर की ओर प्रेरित कर सकते हैं. यह सर्वे बारनवापारा को एक प्रमुख बर्डिंग डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है.
दुर्लभ प्रजातियों के लिए उम्मीद
आज कई पक्षी प्रजातियां ऐसी हैं जिनकी संख्या लगातार घट रही है. उनके संरक्षण के लिए सबसे जरूरी है सटीक और समयबद्ध डेटा. यह सर्वे उन्हीं प्रजातियों की पहचान और निगरानी में मदद करेगा, जो खतरे में हैं या जिनकी उपस्थिति में गिरावट दर्ज की जा रही है. यह जानकारी भविष्य की संरक्षण योजनाओं, अनुसंधान और दीर्घकालिक प्रबंधन हस्तक्षेपों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी.
पंखों के साथ उड़ती पहचान
बर्ड सर्वे 2026 केवल तीन दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि यह बारनवापारा के भविष्य की दिशा तय करने वाला प्रयास है. यह साबित करता है कि यदि वैज्ञानिक दृष्टिकोण, स्थानीय सहभागिता और सही मंच मिल जाए, तो छत्तीसगढ़ के जंगल राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना सकते हैं.


