छत्तीसगढ़

15 जून के बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा सकते हैं छत्तीसगढ़ के कोटवार

गांवों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं कोटवार

  1. 20 हजार रुपए मानदेय की मांग
  2. नियमित कर्मचारी का दर्जा देने की मांग

रायपुर: छत्तीसगढ़ में कोटवार अपनी कई मांगों को लेकर अब आंदोलन की तैयारी में हैं. प्रदेशभर के कोटवारों ने सरकार को अल्टीमेटम दिया है कि अगर 15 जून तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे. प्रदेश में करीब 15 हजार कोटवार कार्यरत हैं. उन्हें वर्तमान में 2250 रुपए से लेकर 6000 रुपए तक मानदेय मिलता है. कोटवारों का कहना है कि इतने कम मानदेय में परिवार चलाना मुश्किल हो गया है.

कोटवार गांवों में मुनादी करने, कोर्ट नोटिस पहुंचाने, थाना और तहसील की सूचना देने सहित कई प्रशासनिक कार्य करते हैं. इसके अलावा गांव में किसी भी घटना, विवाद, आत्महत्या, आगजनी या प्राकृतिक आपदा की जानकारी प्रशासन तक पहुंचाने का काम भी कोटवारों द्वारा किया जाता है.

छोटे देवगांव के कोटवार मेहतर सिंह चौहान ने बताया कि वे वर्ष 1995 से कोटवारी कर रहे हैं और उन्हें केवल 3 हजार रुपए मानदेय मिलता है. उन्होंने कहा कि कोटवारों से लगातार अतिरिक्त काम भी लिया जा रहा है.

वर्तमान में हमसे ड्राइवरी, कंप्यूटर ऑपरेटर और साफ-सफाई जैसे काम भी करवाए जा रहे हैं. सरकार को कोटवारों को कम से कम 20 हजार रुपए मासिक मानदेय देना चाहिए.- मेहतर सिंह, कोटवार

कोटवार एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष प्रेम किशोर बाघ ने कहा कि अविभाजित मध्यप्रदेश के समय से ही कोटवारों को नियमित कर्मचारी घोषित करने और राजस्व विभाग में संविलियन की मांग की जा रही है.

कोटवार सरकार और जनता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी का काम करते हैं, लेकिन आज तक उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं.- प्रेम किशोर बाघ, प्रदेश अध्यक्ष कोटवार एसोसिएशन

कोटवारों की प्रमुख मांगें
नियमितीकरण और सम्मानजनक वेतन- कोटवारों को नियमित कर्मचारी घोषित कर राजस्व विभाग में संविलियन किया जाए और सम्मानजनक वेतन दिया जाए.
नियुक्ति में पारदर्शिता- कोटवारी नियुक्ति में हो रही अनियमितता और भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जाए तथा परिवार के सदस्यों को प्राथमिकता दी जाए.
अतिरिक्त काम से राहत- कोटवारों से अनावश्यक बेगारी कार्य न करवाया जाए और तहसील-थाना में महीने में केवल एक बार ही उपस्थिति ली जाए.
सुरक्षा और कानूनी कार्रवाई- कोटवारों के साथ मारपीट या हत्या के मामलों में आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जाए.
आंदोलन की चेतावनी

कोटवार संघ का कहना है कि यदि सरकार जल्द उनकी मांगों पर निर्णय नहीं लेती है तो 15 जून के बाद प्रदेशभर के कोटवार अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करेंगे.

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