छत्तीसगढ़

मंगल कार्बन फैक्ट्री में फर्नेस ब्लास्ट

मां की गोद में सोई नौ माह की बच्ची समेत आठ लोग झुलसे...

रायगढ़। खरसिया के ग्राम बानीपाथर में स्थित मंगल कार्बन प्लांट में टायर गलाने के दौरान अचानक विस्फोट हो गया। इस दौरान वहां काम कर रहे सात मजदूर और एक दूधमुंही बच्ची बुरी तरह से झुलस गए। इनमें से चार की हालत गंभीर है। घायलों को पहले जिला अस्पताल और फिर जिंदल फोर्टिस हॉस्पिटल ले जाया गया। वहां से सात लोगों को कालड़ा नर्सिंग होम रायपुर रिफर किया गया है। यह हृदयविदारक घटना गुरुवार सुबह हुई। बानीपाथर में अविनाश गर्ग के नाम पर कार्बन प्लांट लगाने की अनुमति दी गई है। शारीरिक परेशानी के कारण वे आना-जाना नहीं कर पाते हैं पूरा काम विमल ही संभालते हैं। प्लांट में पुराने टायरों को उच्च तापमान वाली भट्ठी में गलाकर लिक्विड कार्बन में बदला जाता है। अंदर टायर के तार ही बचे रह जाते हैं और पूरा कार्बन बाहर निकाल लिया जाता है।

बुधवार रात को टायर गलाकर फर्नेस को ठंडा होने के लिए छोड़ दिया गया था। सुबह कार्बन निकालने के बाद बॉयलर को खोला जाना था। उसका तापमान सुबह भी ज्यादा ही था। शिव खडिय़ा की पत्नी अपनी छोटी बच्ची को लेकर खाना देने पहुंची थी, तभी फर्नेस के ढक्कन को खोलने के लिए बोल्ट निकाले गए। दो बोल्ट बचे थे, तभी धमाका हुआ और अंदर बचा हुआ कार्बन सभी मजदूरों के शरीर में चिपक गया। मीथेन गैस की वजह से ऑक्सीजन के संपर्क में आते ही विस्फोट हो गया। इस हादसे में शिव खडिय़ा पिता साहेबराम खडिय़ा 35 वर्ष, साहेबराम खडिय़ा 55 वर्ष, उदासिनी पति शिव खडिय़ा 30 वर्ष, भूमि खडिय़ा 9 माह, कौशल पटेल पिता पतिराम पटेल 20 वर्ष निवासी रजघटा, प्रिया सारथी पति चमार सिंह निवासी ठाकुरदिया 32 वर्ष, राज पिता चमार सिंह और इंद्रीवर पिता चमार सिंह 19 वर्ष बुरी तरह झुलस गए।

घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। एसडीएम प्रवीण तिवारी, एसडीओपी और उप संचालक आईएचएसडी राहुल पटेल ने मौके पर जाकर जांच की। बताया जा रहा है कि घायलों में तीन की हालत ठीक है लेकिन छोटी बच्ची समेत अन्य की स्थिति खराब है। जानकारी मिली है कि प्लांट में श्रम और औद्योगिक सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही थी। विधायक उमेश नंद कुमार पटेल ने भी इस पर सख्त नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि प्रबंधन की लापरवाही की जांच होनी चाहिए और जब तक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न हों, फैक्ट्री का संचालन बंद रहना चाहिए। उन्होंने घायलों के इलाज के लिए उचित प्रबंध करने की जरूरी निर्देश भी दिए।

 

मालिक के कहने पर ले गए जिला अस्पताल
बुरी तरह झुलसे मजदूरों की जान बचाने के लिए तत्काल अच्छा इलाज चाहिए था। प्लांट मालिक के कहने पर मैनेजर रुपेश ने सबको जिला अस्पताल ले जाने को कहा। फटकार पडऩे पर सभी को जिंदल फोर्टिस अस्पताल रिफर किया गया। वहां केवल एक को रोककर बाकी सभी को कालडा नर्सिंग होम रायपुर शिफ्ट किया गया। हैरान करने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिहाज से खतरनाक स्तर के प्लांट में किसी भी मजदूर का हेल्थ इंश्योरेंस नहीं किया गया था। न ही किसी को ईएसआईसी का लाभ मिल रहा था।

नहीं पहुंचे प्लांट मालिक
घटना के बाद मजदूरों को प्लांट मैनेजर के हवाले कर दिया गया। प्लांट का संचालन करने वाले मौके पर पहुंचे ही नहीं। यह प्लांट बानीपाथर में उसी क्रशर के बाजू में स्थित है, जहां कुछ साल पहले एक हत्या हो गई थी। अस्पताल में भी मजदूरों के प्रति प्लांट प्रबंधन की संवदेनशीलता नहीं दिखी।

प्लांट सील, कठोर धाराएं लगीं
औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग ने प्लांट परिसर का जायजा लेकर रिपोर्ट तैयार कर ली है। घटना में प्लांट प्रबंधन की लापरवाही साफ नजर आ रही है क्योंकि अकुशल और अप्रशिक्षित मजदूरों से काम लिया जा रहा था। उनकी सुरक्षा के इंतजाम ही नहीं थे। मंगल कार्बन को सील कर दिया गया है। कारखाना अधिनियम 1948 की धारा 7 ए (1), 7 ए (2) (ए), 7 ए (2) (सी), 41 और 73 के तहत अधिभोगी सह प्रबंधक अविनाश गर्ग को नोटिस जारी किया जा गया है।

एसडीएम, पुलिस और आईएचएसडी की टीम पहुंची मौके पर, पहले जिला अस्पताल फिर जिंदल फोर्टिस हॉस्पिटल के बाद रायपुर रिफर
रायगढ़। खरसिया के ग्राम बानीपाथर में स्थित मंगल कार्बन प्लांट में टायर गलाने के दौरान अचानक विस्फोट हो गया। इस दौरान वहां काम कर रहे सात मजदूर और एक दूधमुंही बच्ची बुरी तरह से झुलस गए। इनमें से चार की हालत गंभीर है। घायलों को पहले जिला अस्पताल और फिर जिंदल फोर्टिस हॉस्पिटल ले जाया गया। वहां से सात लोगों को कालड़ा नर्सिंग होम रायपुर रिफर किया गया है। यह हृदयविदारक घटना गुरुवार सुबह हुई। बानीपाथर में अविनाश गर्ग के नाम पर कार्बन प्लांट लगाने की अनुमति दी गई है। शारीरिक परेशानी के कारण वे आना-जाना नहीं कर पाते हैं पूरा काम विमल ही संभालते हैं। प्लांट में पुराने टायरों को उच्च तापमान वाली भट्ठी में गलाकर लिक्विड कार्बन में बदला जाता है। अंदर टायर के तार ही बचे रह जाते हैं और पूरा कार्बन बाहर निकाल लिया जाता है।

बुधवार रात को टायर गलाकर फर्नेस को ठंडा होने के लिए छोड़ दिया गया था। सुबह कार्बन निकालने के बाद बॉयलर को खोला जाना था। उसका तापमान सुबह भी ज्यादा ही था। शिव खडिय़ा की पत्नी अपनी छोटी बच्ची को लेकर खाना देने पहुंची थी, तभी फर्नेस के ढक्कन को खोलने के लिए बोल्ट निकाले गए। दो बोल्ट बचे थे, तभी धमाका हुआ और अंदर बचा हुआ कार्बन सभी मजदूरों के शरीर में चिपक गया। मीथेन गैस की वजह से ऑक्सीजन के संपर्क में आते ही विस्फोट हो गया। इस हादसे में शिव खडिय़ा पिता साहेबराम खडिय़ा 35 वर्ष, साहेबराम खडिय़ा 55 वर्ष, उदासिनी पति शिव खडिय़ा 30 वर्ष, भूमि खडिय़ा 9 माह, कौशल पटेल पिता पतिराम पटेल 20 वर्ष निवासी रजघटा, प्रिया सारथी पति चमार सिंह निवासी ठाकुरदिया 32 वर्ष, राज पिता चमार सिंह और इंद्रीवर पिता चमार सिंह 19 वर्ष बुरी तरह झुलस गए।

घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। एसडीएम प्रवीण तिवारी, एसडीओपी और उप संचालक आईएचएसडी राहुल पटेल ने मौके पर जाकर जांच की। बताया जा रहा है कि घायलों में तीन की हालत ठीक है लेकिन छोटी बच्ची समेत अन्य की स्थिति खराब है। जानकारी मिली है कि प्लांट में श्रम और औद्योगिक सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही थी। विधायक उमेश नंद कुमार पटेल ने भी इस पर सख्त नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि प्रबंधन की लापरवाही की जांच होनी चाहिए और जब तक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न हों, फैक्ट्री का संचालन बंद रहना चाहिए। उन्होंने घायलों के इलाज के लिए उचित प्रबंध करने की जरूरी निर्देश भी दिए।

मालिक के कहने पर ले गए जिला अस्पताल
बुरी तरह झुलसे मजदूरों की जान बचाने के लिए तत्काल अच्छा इलाज चाहिए था। प्लांट मालिक के कहने पर मैनेजर रुपेश ने सबको जिला अस्पताल ले जाने को कहा। फटकार पडऩे पर सभी को जिंदल फोर्टिस अस्पताल रिफर किया गया। वहां केवल एक को रोककर बाकी सभी को कालडा नर्सिंग होम रायपुर शिफ्ट किया गया। हैरान करने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिहाज से खतरनाक स्तर के प्लांट में किसी भी मजदूर का हेल्थ इंश्योरेंस नहीं किया गया था। न ही किसी को ईएसआईसी का लाभ मिल रहा था।

नहीं पहुंचे प्लांट मालिक
घटना के बाद मजदूरों को प्लांट मैनेजर के हवाले कर दिया गया। प्लांट का संचालन करने वाले मौके पर पहुंचे ही नहीं। यह प्लांट बानीपाथर में उसी क्रशर के बाजू में स्थित है, जहां कुछ साल पहले एक हत्या हो गई थी। अस्पताल में भी मजदूरों के प्रति प्लांट प्रबंधन की संवदेनशीलता नहीं दिखी।

प्लांट सील, कठोर धाराएं लगीं
औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग ने प्लांट परिसर का जायजा लेकर रिपोर्ट तैयार कर ली है। घटना में प्लांट प्रबंधन की लापरवाही साफ नजर आ रही है क्योंकि अकुशल और अप्रशिक्षित मजदूरों से काम लिया जा रहा था। उनकी सुरक्षा के इंतजाम ही नहीं थे। मंगल कार्बन को सील कर दिया गया है। कारखाना अधिनियम 1948 की धारा 7 ए (1), 7 ए (2) (ए), 7 ए (2) (सी), 41 और 73 के तहत अधिभोगी सह प्रबंधक अविनाश गर्ग को नोटिस जारी किया जा गया है।

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