कोरबा: बुढ़ापा आ गया लेकिन दूर नहीं हुई पानी की किल्लत
नल लगने के बाद भी घर तक नहीं पहुंचा पानी


कोरबा: हर घर नल के जरिए पेयजल पहुंचाने की केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन का कोरबा जिले में बुरा हाल है. हालात यह है कि 2 साल पहले लगाए नल में अब तक पानी नहीं पहुंचा है. ग्रामीण आज भी पानी के लिए तरस रहे हैं.
कोरबा जिले के बरपाली और आसपास के कई गांवों में घरों के सामने नल दिखाई देते हैं, पाइपलाइन बिछा दिए गए लेकिन इनमें पानी कब आएगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है. गांव में बिजली से चलने वाले बोर और सिंटेक्स टैंक है. लेकिन बिजली के गुल हो जाने पर यहां से भी पानी भरने में परेशानी हो जाती है. हैंडपंप ही एक जरिया बच जाता है. कई ग्रामीण अब भी पानी के लिए लंबा सफर करते हैं, तब जाकर उन्हें रोजमर्रा के लिए जरूरी पानी मिल पाता है.
“जब से पैदा हुए तब से तालाब, बोरिंग और दूसरे स्रोत का पानी पी रहे”
स्थानीय निवासी बसाहिनबाई का कहना है कि पानी की समस्या गांव में बनी हुई है. दूसरे जगह से पानी लाकर पीते हैं. बूढ़े हो गए लेकिन पानी की समस्या दूर नहीं हुई. बोरिंग है वहीं से पानी लाते हैं. बोरिंग खराब होने पर, इसे स्थानीय लोग ही किसी तरह बनाते हैं. पानी के बिना दिक्कत तो होती है.
फुलबासन बाई बताती है “गांव में लगे टेप नल से पानी नहीं आता. बोरिंग लगा है, इसी से पानी लाकर पीते हैं. कुछ लोगों ने अपने घर में बोर खुदवा लिया है. वहां से भी कई लोग पानी ले लेते हैं, काफी दिन बीत गए 2 साल से अधिक, लेकिन गांव में पानी नहीं आया है. बस टेप नल को गड़ा दिया गया है. अभी तक इसमें पानी नहीं आया है.”
नल के लिए बनाए जगह पर गिट्टी डंप (ETV Bharat Chhattisgarh)
महेतरीन बाई, स्थानीय निवासी ने कहा “गांव में पानी नहीं पहुंचा है. जब से गांव में मेरा जन्म हुआ है. तब से तालाब से और बोरिंग से ही पानी लाते हैं. अब तो मैं भी बूढी हो गई हूं, नल तो लगा है, लेकिन वो चालू नहीं हुआ है.”
नन्हे राम का कहना है कि गांव में नल लग गया, लेकिन इसमें पानी नहीं आता. कुछ जगहों पर टंकी बन रही है. लेकिन वह भी अधूरा है, इधर-उधर से किसी तरह पानी का इंतजाम करते हैं. लाइट बंद होता है तो बोर भी बंद हो जाता है. समस्या और बड़ी हो जाती है.
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के अफ़सर खुद भी स्वीकार कर रहे हैं कि गांव में जल स्रोत की दिक्कत है. आसपास के इलाके का भूजल स्तर भी नीचे है. तब सवाल यह उठता है कि जब योजना शुरू हुई, तब ठोस प्लानिंग क्यों नहीं गई की गई. टेप नल और पाइपलाइन बिछाने में जो पैसे खर्च हुए उसे बचाया जा सकता था, जल स्रोत का पता पहले क्यों नहीं लगाया गया?
हालांकि कुछ स्थानों पर जल स्रोत मौजूद भी हैं, जहां ओवरहेड टैंक का निर्माण किया जा रहा है. इसमें भी लेट लतीफी हुई. कार्यों को 2024 में ही पूरा कर लेने की डेडलाइन निर्धारित थी. लेकिन इस डेडलाइन में कार्य पूरा नहीं हुआ. अब कार्य पूर्ण करने की अवधि को बढ़ा दिया गया है. जाहिर तौर पर योजना में व्यय होने वाली राशि में भी बढ़ोतरी की गयी है.
पानी का स्रोत मिला. कार्य में लाएंगे तेजी
पीएचई(लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी) के कार्यपालन अभियंता रमन सिंह उरांव, का कहना है कि बरपाली और आसपास पानी के लिए हैंड पंप स्थापित किए गए हैं. जहां तक जल जीवन मिशन के अंतर्गत पानी सप्लाई की बात है, वहां कार्य अभी पूरे नहीं हो पाए हैं, कार्य अभी प्रगति पर है. कुछ जगह पर जल स्रोत की दिक्कत आ रही है, पर्याप्त मात्रा में जितना पानी मिलना चाहिए था, उतना हमें नहीं मिला है. ऐसे स्थान पर नए नलकूप खनन किए हैं और कुछ स्थानों पर हमें जल स्रोत मिल गए हैं. उन जगहों पर जल स्रोत से पाइपलाइन बिछाने और टंकी का काम अभी प्रगति पर है, चुंकि जलस्रोत का इश्यू था इसलिए कार्य धीमी गति से चल रहा था. अब, जब जल स्रोत मिल गया है, तो कार्य में आगे तेजी लाएंगे.
पूरे कोरबा जिले में जल जीवन मिशन के ऐसे हालात
कोरबा जिले में जल जीवन मिशन से स्वीकृत कार्यों की बात करें तो कुल 703 गांवों में 1095 योजना स्वीकृत है. जिसमें से 458 गांवों में एकल ग्राम योजना (सिंगल विलेज स्कीम) है. जबकि शेष कटघोरा, पाली, पोंडीउपरोड़ा विकासखंड के 245 गांव, एतमानगर समूह जल प्रदाय योजना (मल्टी विलेज स्कीम)में शामिल हैं.
पीएचई विभाग जल जीवन मिशन के अंतर्गत इन दोनों योजनाओं में सिंगल विलेज स्कीम में तकरीबन 400 करोड़ रुपए एवं मल्टी विलेज स्कीम में 116 करोड़ रुपए के साथ तकरीबन 51 6 करोड़ रुपए का भुगतान कर चुका है. लेकिन अभी तक योजना पूर्ण नहीं हो पाई है. सिंगल विलेज स्कीम के तहत लगभग 110 गांवों में ही जलापूर्ति शुरू हुई है. जबकि मल्टीविलेज स्कीम का लगभग 30 फीसदी काम पूरा हुआ है. यहां भी अधिकतर गांवों में जल आपूर्ति शुरू नहीं हुई है. विभाग द्वारा भुगतान की गई राशि का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है.



