अपराधछत्तीसगढ़

बलरामपुर PM जनमन योजना : 2.60 करोड़ की सड़क पेपर में, हकीकत में सिर्फ ख्वाब

ठेकेदार की लापरवाही से ग्रामीण बेहाल

  1. पंचायत ने बनाई सड़क, ठेकेदार ने उखाड़ दी
  2. सड़क का सपना अधूरा, ग्रामीण परेशान
  3. ग्रामीणों को नहीं दिख रही उम्मीद

बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के कुसमी विकासखंड में प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत चटनियां गांव से कछवा तक करीब 5 किलोमीटर लंबी पक्की सड़क का निर्माण होना था। इस सड़क की लागत लगभग 2 करोड़ 60 लाख रुपये तय की गई थी और निर्माण एजेंसी के रूप में राजपुर पीएमजीएसवाई इकाई को जिम्मेदारी सौंपी गई थी।योजना का मकसद विशेष पिछड़ी जनजाति बाहुल्य बसाहटों को मुख्य मार्ग से जोड़ना था, ताकि दूरस्थ गांवों तक आवागमन सुगम हो सके और सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से पहुंच सके। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। सड़क निर्माण का जिम्मा संभाल रहे ठेकेदार एलएसी कटरे ने करीब डेढ़ साल पहले निर्माण संबंधी नागरिक सूचना बोर्ड लगाकर काम शुरू होने का संकेत तो दिया, लेकिन इसके बाद निर्माण कार्य ठप पड़ गया।

अब हालत यह है कि, सूचना बोर्ड भी जर्जर होकर गिरने की कगार पर पहुंच चुका है, जबकि सड़क निर्माण की तय समय-सीमा भी समाप्त हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क नहीं बनने से बरसात के मौसम में गांव तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है। कीचड़ और खराब रास्तों के कारण मरीजों, स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस मार्ग पर पक्की सड़क बननी थी, उसी रास्ते पर ग्राम पंचायत ने करीब 100 मीटर सीसी रोड का निर्माण कराया था, जिसे ठेकेदार ने जेसीबी से उखाड़ दिया। लेकिन इसके बाद भी डेढ़ साल बीत जाने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया।

एक ठेकेदार, तीन विकासखंड, और सड़कों का हाल बेकार
जानकारी के मुताबिक, सामरी विधानसभा क्षेत्र के तीन विकासखंडों में प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत बनने वाली कई सड़कों का ठेका एक ही ठेकेदार को दिया गया है। यही वजह है कि निर्माण कार्यों में लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारी, जनप्रतिनिधि और प्रशासन मौन साधे हुए हैं।

इस मामले में जब सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज से सवाल किया गया तो उन्होंने लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया। हालांकि, पहले भी हुई शिकायतों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों को इस आश्वासन से ज्यादा उम्मीद नजर नहीं आ रही।

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