अब तो समझव शिक्षा माध्यम के महत्व ल…
हमन ल धर्म अउ पूजा उपासना के बारे म घलो इही मानक ल अपनाना चाही.

(छत्तीसगढ़ पंचायिका)जेन भाखा म हम शिक्षा पाथन वो भाखा के संगे-संग वोकर ले जुड़े कला, संस्कृति, साहित्य, इतिहास अउ गौरव सबो के हमन ल जानकारी होवत जाथे. वोकर ले जुड़े धर्म, पूजा उपासना के प्रतीक अउ जीवन पद्धति घलोक कोनो न कोनो माध्यम ले हमर जिनगी म समावत जाथे.
आज अपन तीर-तखार ल ही देख लेवव. हमन ल हिन्दी भाखा के माध्यम ले शिक्षा दिए गे हवय, तेकर सेती जतका हिन्दी भाषी क्षेत्र अउ राज्य हें, उन सबो ले जुड़े संस्कृति अउ परंपरा ल घलो हमला कोन न कोनो माध्यम ले पढ़ाए गे हवय, जबकि हमर महतारी भाखा छत्तीसगढ़ी आय, फेर हमला छत्तीसगढ़ी के माध्यम ले शिक्षा नइ दिए गे हे, तेकर परिणाम ए आय के हम छत्तीसगढ़ी ले जुड़े संस्कृति अउ परंपरा ल वतका नइ जानन जतका हिन्दी ले जुड़े संस्कृति अउ परंपरा ल जानथन-समझथन. इही शिक्षा के माध्यम के सेती आज हम अपन मूल संस्कृति अउ परंपरा ल बिसरावत जावत हावन. एकर ले बाँचे बर एकर असल कारन, माने शिक्षा के माध्यम ल अपनाना परही. जब हमर शिक्षा के माध्यम छत्तीसगढ़ी बनही, तभे छत्तीसगढ़ अउ छत्तीसगढ़ी ले जुड़े जम्मो कला, संस्कृति परंपरा, इतिहास अउ गौरव बाँचे पाही, हमर आने वाला पीढ़ी जान पाही, आत्मसात कर पाही.
मैं तो इहाँ तक कहिथौं, हमन ल धर्म अउ पूजा उपासना के बारे म घलो इही मानक ल अपनाना चाही. मैं हमेशा लिखत-बोलत रहिथौं- छत्तीसगढ़ आध्यात्मिक रूप म अतका समृद्ध हे, ते हमला कोनो भी बाहर के न तो कोनो गुरु के जरूरत हे, न कोनो ग्रंथ के अउ न ही कोनो उपासना के प्रतीक या विधि के. इहाँ सबकुछ हे, बस जरूरत अतके हे, के हम अपन पुरखौती परंपरा ल झाँकन, टमड़न, वोला धो-माँज के उजरावन अउ अपन संगे-संग जम्मो पिरोहिल मनला आत्मसात करे बर जोजियावन अरजी करन.
आज हमन छत्तीसगढ़ी भाखा ल शिक्षा के माध्यम बनाए खातिर सरकार जगा गोहरावत रहिथन, वोकर इही सब कारन आय. जे दिन छत्तीसगढ़ी इहाँ के शिक्षा के माध्यम बन जाही, हमर हर किसम के विकास अउ संरक्षण अपने-अपन हो जाही. हमला कोनो भी कारन ले ककरो मुँह देखे के जरूरत नइ परही.
अब तो शिक्षा माध्यम के महत्व ल समझौ संगी हो..
जय छत्तीसगढ़.. जय छत्तीसगढ़ी
-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर



