छत्तीसगढ़

 मैनपुर: बिजली संकट ने बंद कराए पंप : टंकी सूखी, तीर-धनुष के साये में जंगल से ला रहे झिरिया का पानी

मैनपुर। जल जीवन मिशन योजना के तहत गांव -गांव घर-घर पानी पहुंचाने के लिए और लोगों की प्यास बुझाने के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन गरियाबंद जिले के आदिवासी इलाके मैनपुर के पहाड़ी क्षेत्र में बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। आलम यह है कि महिलाएं जंगल मे झरिया खोदकर पानी लाती हैं और उनकी सुरक्षा के लिए पुरुष तीर-धनुष लेकर तैनात नजर आते हैं। यह स्थिति आदिवासी विकासखण्ड मैनपुर के पहाड़ी इलाके ताराझर, कुरवापानी, मटाल गांवों की है

ग्रामीणों की प्यास बुझाने के लिए इन गांवों में सरकार द्वारा हैंडपंप खनन नहीं किया जा सका है। गर्मी के इन दिनों में नदी, नाले, पोखर सूख गए हैं और ग्रामीणो को पीने के पानी के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सूख चुके नदी-नालों में गहरे गड्ढे खोदकर झरिया बनाया गया है और वहां से पानी एकत्र कर लाना पड़ता है। गांव से दूर झरिया होने के कारण अकेला कोई एक व्यक्ति पानी के लिए जा भी नहीं सकता। इसलिए समूह में महिलाएं पानी के लिए जाती हैं।

कुल्हाड़ीघाट भी पेयजल संकट से जूझ रहा
झरिया को साफ कर फिर से पानी आने तक इंतजार करना पड़ता है। क्योंकि जंगल के अंदर झरिया होने के कारण जंगली जानवर भी इसके आसपास विचरण करते रहते हैं। यही वजह है कि महिलाओं के साथ गांव के और घर के पुरुषों को तीर धनुष लेकर जाना पड़ता है। ग्राम पंचायत कुल्हाड़ीघाट के आश्रित ये सभी गांव पहाड़ी के ऊपर स्थित हैं। कुल्हाड़ीघाट भी पेयजल संकट से जूझ रहा है। यह कमार जनजातियों का गांव है। यहां लाखों रुपए की लागत से जल जीवन मिशन के तहत पानी की टंकी का निर्माण किया गया है और यह शुरू में चल भी रहा था, लेकिन अब एक माह से बंद है क्योंकि लो वोल्टेज के कारण पानी टंकी नहीं भर पा रही है। कई बार इसकी शिकायत ग्रामीणों द्वारा की जा चुकी है।

जल जीवन मिशन के तहत नल कनेक्शन में नहीं आ रहा पानी
गरियाबंद जिले के पहाड़ी के ऊपर बसे जनजाति बसाहवट वाले ग्राम पंचायत ओड़, आमामोरा, कुकराल, नगराल, हथोड़ाडीह, जोकपारा, डडईपानी में दो दर्जन से ज्यादा हैंडपंप मौजूद हैं, लेकिन अधिकांश में लाल आयरनयुक्त पानी निकलता है। इसलिए इन जलस्त्रोतों के पानी का उपयोग कभी पीने के लिए नहीं किया जाता। पांच से ज्यादा आश्रित गांवों में ग्रामीण सूख चुके नदी नालों में झरिया खोदकर पीने का पानी की व्यवस्था करते हैं। यहां भी जल जीवन मिशन के तहत नल कनेक्शन लगाया गया है लेकिन पानी नहीं आता।

अवगत कराया जा चुका
ग्राम पंचायत कुल्हाड़ीघाट के सरपंच बनसिंग सोरी ने बताया कि पहाड़ी के ऊपर बसे ताराझर, कुरवापानी, भालूडिग्गी, मटाल जैसे गांवों में पेयजल की भारी दिक्कत उत्पन्न हो गई है। ग्रामीण झरिया खोदकर पानी एकत्र कर रहे हैं। इस समस्या से कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। हर बार समस्या समाधान करने का आश्वासन मिलता है, लेकिन ठोस पहल अब तक नहीं हुई है।

क्या कहते हैं विधायक
बिन्द्रानवागढ़ विधानसभा क्षेत्र के विधायक जनक ध्रुव ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में बसे ग्रामों में पेयजल की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। लगातार शिकायत आ रही है और इसके समाधान करने के लिए उनके द्वारा संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। श्री ध्रुव ने कहा कि नक्सलमुक्त होने के बाद अब वे स्वयं इन गांवों तक पहुंचे रहे हैं। जल्द ही पहाड़ी के ऊपर बसे ग्रामों का दौरा करेंगे।

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