
रायगढ़। भ्रष्टाचार का रस जो एक बार चख लेता है, वह उसी स्वाद को बार-बार चखना चाहता है। सरकार भी ऐसे अधिकारियों का संरक्षण उनको ऐसे महत्वपूर्ण पदों पर बैठाती है जहां वे अकूत दौलत एकत्र कर सकें। रायगढ़ में हाउसिंग बोर्ड के ईई रहे पूनमचंद अग्रवाल अपने कारनामों के कारण हमेशा सुर्खियों में रहे। इस बार वे 65 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार हो गए हैं। एसीबी ने अंबिकापुर में कार्रवाई की है। एंटी करप्शन ब्यूरो ने अंबिकापुर के उपायुक्त हाउसिंग बोर्ड पूनमचंद अग्रवाल और उनके बाबू वरिष्ठ सहायक ग्रेड-2 अनिल सिन्हा को 65 हजार रुपए रिश्वत लेते समय रंगे हाथ पकड़ा है। ठेकेदार रवि कुमार ने एसीबी को आवेदन दिया था। उनको 2023 में 65 लाख रुपए की लागत से बलरामपुर जिले के कोचली में नवीन तहसील भवन और लुण्ड्रा में 43.51 लाख की लागत से कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में 6 अतिरिक्त कक्ष निर्माण का ठेका मिला था।
दोनों का निर्माण पूरा तो हुआ लेकिन समय पर नहीं हुआ। इसलिए समयावृद्धि और भौतिक सत्यापन के लिए विभाग में आवेदन दिया था। दोनों निर्माण मिलाकर करीब 35 लाख का भुगतान भी बाकी था। उपायुक्त पूनमचंद अग्रवाल ने दोनों कामों के लिए 30-30 हजार रुपए कुल 60 हजार रुपए की मांग की थी। एसीबी की टीम ने गुरुवार को ठेकेदार के हाथ 60 हजार रुपए देकर भेजा था, लेकिन बाबू अनिल सिन्हा ने दस हजार रुपए अतिरिक्त की मांग की। तब एसीबी ने पुन: 5000 रुपए के नोट मिलाकर कुल 65 हजार रुपए भेजे। सिन्हा ने 5 हजार रुपए निकालकर रख लिए और ठेकेदार ने बाकी राशि अंदर केबिन में जाकर पूनमचंद को दे दी। उसी समय एसीबी ने रंगेहाथ दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
रायगढ़ में भी कई किस्से
हाउसिंग बोर्ड रायगढ़ में पूर्व ईई पूनमचंद अग्रवाल का कार्यकाल सुर्खियों भरा रहा। रायगढ़ में भ्रष्टाचार सामने आने के बाद उन पर कार्रवाई भी हुई थी। मकान और रिक्त प्लॉट को आवंटित करने में अनियमितताएं हुई थी। दुर्ग में भी पूनमचंद पर आरोप लगे कि उन्होंने कमजोर आय वर्ग और मध्यम वर्ग के मकानों को एनआर वायर्स प्रालि डायरेक्टर को आवंटित कर दिए। ये रिश्ते में उनके मामा हैं। इस शिकायत पर सरकार ने जांच के आदेश दिए थे लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।



