छत्तीसगढ़

गिद्ध संरक्षण में छत्तीसगढ़ को सफलता

इंद्रावती टाइगर रिजर्व बना देश का मॉडल

रायपुर: वन्य प्राणियों को लेकर छत्तीसगढ़ से एक अच्छी खबर सामने आई है. राज्य के इंद्रावती टाइगर रिजर्व ने गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में देशभर के लिए एक नया उदाहरण पेश किया है. मध्य भारत के सबसे स्वच्छ नदी-वन पारिस्थितिकी तंत्रों में शामिल यह रिजर्व अब केवल बाघों और जंगली भैंसों का ही नहीं, बल्कि विलुप्तप्राय गिद्धों के संरक्षण का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है

गिद्धों के लिए सुरक्षित क्षेत्रों का हुआ निर्माण
छत्तीसगढ़ के इंद्रावती टाइगर रिजर्व क्षेत्र में गिद्धों के लिए सुरक्षित क्षेत्रों (Vulture Safe Zones) का निर्माण कर इनकी घटती आबादी को बचाने का काम किया गया है. आज के दौर में गिद्धों के अस्तित्व पर जहरीली दवाओं (NSAID), असुरक्षित शव निपटान और मानव हस्तक्षेप जैसे गंभीर खतरे मंडरा रहे हैं. इन चुनौतियों से निपटने के लिए इंद्रावती टाइगर रिजर्व में टेलीमेट्री आधारित निगरानी कार्यक्रम चल रहा है. जिससे यह मदद मिल रही है.

10,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में गिद्ध हैं सक्रिय
छत्तीसगढ़ में यह अपनी तरह का पहला प्रयास है, जिसमें उच्च-रिज़ॉल्यूशन गिद्ध गतिविधि डेटा का उपयोग संरक्षण कार्यों की दिशा तय करने के लिए किया जा रहा है. अब तक के आंकड़ों से पता चला है कि गिद्ध लगभग 10,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं और घने जंगलों और मानव बस्तियों के बीच लगातार आवाजाही करते हैं.

वन्यजीव प्रबंधन से मिली सफलता
साल 2022 से 2025 के बीच गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गई हैं. राज्य में पहली बार दो गिद्धों की सैटेलाइट ट्रैकिंग के माध्यम से 18,000 से अधिक उच्च गुणवत्ता वाले GPS डेटा पॉइंट्स प्राप्त किए गए हैं, जिससे वन्यजीव प्रबंधन को नई वैज्ञानिक दिशा मिली है.

इस सफलता में क्षेत्रीय जीवविज्ञानी सूरज कुमार के नेतृत्व में “गिद्ध मित्र दल” (गिद्ध संरक्षण स्वयंसेवक दल) की अहम भूमिका रही है. यह दल घोंसलों की निगरानी, शवों के सुरक्षित प्रबंधन और स्थानीय समुदायों को संरक्षण से जोड़ने का काम करता है. इसका ऐसा असर है कि गुड्डा सारी गुट्टा जैसे दुर्गम क्षेत्रों में पहली बार गिद्धों का निर्बाध प्रजनन सुनिश्चित हो पाया है.

वुल्चर रेस्टोरेंट की स्थापना
छत्तीसगढ़ में गिद्धों के सरक्षण की दिशा में वुल्चर रेस्टोरेंट की स्थापना भी की गई है. इस रेस्टोरेंट की स्थापना उप-निदेशक संदीप बलागा के नेतृत्व में हुई है. वुल्चर रेस्टोरेंट गिद्धों का नियंत्रित भोजन स्थल है, जहां केवल पशु चिकित्सा परीक्षण के बाद NSAID-मुक्त शव ही रखे जाते हैं. इससे गिद्धों को सुरक्षित भोजन मिल रहा है.

वल्चर सुरक्षित जोन की स्थापना
छत्तीसगढ़ में वल्चर सुरक्षित जोन की स्थापना की जा रही है. गिद्धों के संरक्षण में और मदद मिलेगी. इस चरण में तीन अतिरिक्त गिद्धों की सैटेलाइट टैगिंग की जा रही है. 50 से अधिक जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन, पंचायतों की भागीदारी से 100 किलोमीटर क्षेत्र में गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र (Vulture Safe Zone) की स्थापना हुई है.

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