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डेढ़ साल से स्कूल नहीं पहुंचा शिक्षक, रामानुजनगर में भगवान भरोसे बच्चों की चल रही पढ़ाई

विकासखंड शिक्षा अधिकारी पांडेय ने इसकी जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी को भेजी है.

एमसीबी: बच्चों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार लाखों रुपए खर्च करती है. बच्चों को स्कूल से किताबें और ड्रेस तक दिए जाते हैं, ताकि ग्रामीण बच्चों में पढ़ाई के प्रति जिज्ञासा जगे. यहां तक की बच्चों को स्कूलों में मिड डे मील भी दिया जाता है. शासन की कोशिश है कि बच्चों की पढ़ाई के साथ उनकी सेहत को भी दुरुस्त रखा जाए. लेकिन सरकार की इन तमाम कोशिशों को कुछ शिक्षक पलीता लगाने से बाज नहीं आते हैं.

डेढ़ साल से स्कूल नहीं आ रहा शिक्षक
ऐसा ही एक मामला मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर में सामने आया है. यहां जिले के प्राथमिक शाला रामानुजनगर में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे संचालित हो रही है. स्कूल में पदस्थ सहायक शिक्षक नीतेश कुमार पांडेय पिछले डेढ़ सालों से बिना किसी पूर्व सूचना के विद्यालय से गायब हैं. हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय तक अनुपस्थित रहने के बावजूद शिक्षा विभाग अब तक कोई ठोस कार्रवाई उनपर नहीं कर पाया है. मामला जनदर्शन में शिकायत के बाद उजागर हुआ, जिससे विभागीय लापरवाही भी उजागर हो गई.

ग्रामीणों के अनुसार सहायक शिक्षक नीतेश कुमार पांडेय ने 3 अक्टूबर 2023 को विद्यालय में ज्वाइनिंग दी थी, लेकिन 20 सितंबर 2024 से वे लगातार स्कूल से अनुपस्थित रहे हैं. बताया जा रहा है कि उन्होंने न तो विद्यालय प्रबंधन को और न ही विभाग को किसी प्रकार की सूचना दी। इसके बावजूद विभाग महीनों तक केवल कागजी कार्रवाई करता रहा. प्राथमिक शाला रामानुजनगर में लगभग 30 छात्र पढ़ते हैं. स्कूल में कुल 2 शिक्षक पदस्थ हैं, लेकिन एक शिक्षक के लगातार गायब रहने के कारण पूरे विद्यालय की जिम्मेदारी एकमात्र शिक्षक पर आ गई है. एक ही शिक्षक को सभी कक्षाओं के बच्चों को संभालना पड़ रहा है, जिससे पढ़ाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है.

विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने भेजा नोटिस
मामले को गंभीर मानते हुए तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी द्वारा 30 दिसंबर 2024 को संबंधित शिक्षक को नोटिस जारी किया. नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई थी कि यदि कोई शासकीय सेवक एक माह या उससे अधिक समय तक अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहता है, तो उसकी अनुपस्थिति को सेवा व्यवधान माना जाएगा. साथ ही 7 दिवस के भीतर स्पष्टीकरण और मेडिकल बोर्ड का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए. यह भी कहा गया था कि जवाब नहीं देने पर सेवा से पृथक करने की कार्रवाई की जाएगी. लेकिन सवाल यह है कि नोटिस जारी होने के इतने लंबे समय बाद भी जब शिक्षक का कोई जवाब नहीं आया, तब विभाग ने अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की? आखिर किसके संरक्षण में एक शिक्षक डेढ़ साल तक स्कूल से गायब रह सकता है ?

जिला शिक्षा अधिकारी को भेजी गई शिकायत
वर्तमान विकासखंड शिक्षा अधिकारी विपिन कुमार पांडेय ने भी पूरे मामले की जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी को भेज दी गई है. छात्रों के अभिभावक चाहते हैं कि जल्द से जल्द स्कूल में शिक्षक का बंदोबस्त किया जाए, ताकि उनके बच्चों की पढ़ाई ठीक से हो सके.

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