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केदारनाथ धाम के कपाट खुले, 51 क्विंटल गेंदे के फूलों से हुआ मंदिर का शृंगार

CM धामी ने की पहली पूजा

केदारनाथ: हिमालय की गोद में बसे विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट आज विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं. धाम के कपाट खुलने के समय केदारनाथ मंदिर को 51 क्विंटल ताजे गेंदे के फूलों से सजाया गया था. सीएम पुष्कर सिंह धामी खुद केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के साक्षी बने. सीएम धामी ने मंदिर में पहली पूजा की. कपाट खुलने को लेकर देश-विदेश से पहुंचे भक्तों में भारी उत्साह देखा गया. बाबा केदार के जयकारों से पूरा धाम गुंजायमान है. वातावरण पूरी तरह भक्ति के रंग में रंग चुका है.

सीएम धामी ने पीएम मोदी के नाम से की पहली पूजा: बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि सीएम धामी ने पीएम मोदी के नाम से भगवान केदारनाथ की पहली पूजा की. आज 10 हजार से अधिक श्रद्धालु कपाट खुलने के साक्षी बने. पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने अपने संदेश में श्री केदारनाथ धाम के कपाट खुलने पर शुभकामनाएं दी.

केदारनाथ में दिख रही बर्फ: कपाट खुलने के अवसर पर दानी दाताओं के सहयोग से बीकेटीसी द्वारा केदारनाथ धाम को कई क्विंटल फूलों से सजाया गया. बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों के लिए भंडारे भी लगाये गए. केदारनाथ धाम में विगत दिनों से मौसम सामान्यतौर पर साफ है. संपूर्ण केदारनाथ क्षेत्र में हल्की बर्फ नजर आ रही है तथा मौसम सर्द बना हुआ है.

कपाट खुलने की प्रक्रिया आज सुबह पांच बजे से शुरू हुई सुबह साढ़े पांच बजे से श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) कर्मचारी मंदिर परिसर में तैनात हो गये थे. सुबह सात बजे श्री केदारनाथ धाम के रावल भीमाशंकर लिंग, पुजारी टी गंगाधर लिंग, विधायक केदारनाथ आशा नौटियाल, बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, बीकेटीसी उपाध्यक्ष विजय कप्रवाण, जिलाधिकारी एवं बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी विशाल मिश्रा, धर्माचार्यों वेदपाठीगणों भैरव नाथ जी के पश्वा अरविंद शुक्ला ने पूरब द्वार से मंदिर में प्रवेश किया तथा मंदिर के गर्भगृह के द्वार की पूजा-अर्चना में शामिल हुए.

देवी देवताओं का आव्हान कर जन कल्याण की कामना तथा संकल्प के साथ ही ठीक प्रातः आठ बजे श्री केदारनाथ मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए दर्शनार्थ खोल दिये गये।इसी समय मंदिर का मुख्य अर्थात दक्षिण द्वार भी खुल गया.

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इस अवसर पर यात्रा से जुड़े सभी विभागों का आभार जताया कहा कि मंदिर समिति श्रद्धालुओं को सरल सुगम दर्शन व्यवस्था हेतु प्रतिबद्ध है. कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा निर्देश में श्री केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण हुआ है.

धाम में गैर सनातनियों का प्रवेश प्रतिबंधित: उन्होंने बताया कि केदारनाथ धाम में गैर सनातनियों का प्रवेश सर्वथा वर्जित रहेगा. मंदिर से 70 मीटर दायरे में मोबाइल फोन प्रतिबंधित है. फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी एवं रील निर्माण प्रतिबंधित किया गया है. बताया कि समिति तीर्थयात्रियों की सेवा को लेकर तत्पर है. बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी बीते कल मंगलवार को भगवान केदारनाथ की पंचमुखी डोली के साथ पैदल चलकर केदारनाथ धाम पहुंचे.

11वां ज्योतिर्लिंग है केदारनाथ: केदारनाथ धाम को द्वादश ज्योतिर्लिंगों में ग्यारहवें ज्यातिर्लिंग के रूप में पूजा जाता है. ग्रीष्मकाल के छह माह नर तो शीतकाल के छह माह में देवता भगवान केदारनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं. केदारनाथ धाम उत्तराखंड के चार धामों में से एक और पंच केदार में प्रथम केदार के रूप में पूजा जाता है. शीतकाल में केदारनाथ धाम में बर्फबारी होने के बाद कपाट छह माह के लिये कपाट बंद हो जाते हैं. शीतकालीन पूजा-अर्चना शीतकालीन गददीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में संपन्न की जाती है.

पांडवों ने की थी ज्योतिर्लिंग की स्थापना: मेरु-सुमेरु पर्वत की तलहटी के बीच केदार सिंह पर्वत और मंदाकिनी के तट पर भगवान केदारनाथ का भव्य मंदिर विराजमान है. मान्यता है कि द्वापर युग में पांडव गोत्र हत्या की मुक्ति से केदारनाथ धाम आये थे. भगवान शिव ने पांडवों को यहां महिष रूप में दर्शन दिये थे. जिसके बाद यहां पांडवों ने भगवान शिव के केदारनाथ के रूप में ज्योतिर्लिंग की स्थापना की. मंदिर के गर्भ गृह में भगवान शिव का त्रिकोणीय आकार में शिव लिंग स्थित है.

DOORS OF KEDARNATH DHAM OPEN
CM धामी की मौजूदगी में आज केदारनाथ के कपाट खुले (Etv Bharat)
यह भी मान्यता है कि यह ज्योतिर्लिंग सतयुग का है और सतयुग में यहां नर-नारायण भगवान केदारनाथ की तपस्या करते थे. केदारनाथ धाम मंदाकिनी नदी का उद्गम स्थल भी है. प्रत्येक वर्ष अप्रैल-मई माह में छह माह ग्रीष्मकाल के लिये भगवान केदारनाथ के कपाट आम भक्तों के दर्शनों के लिये खुले रहते हैं. जबकि शीतकाल में दीपावली के बाद भैयादूज के पर्व पर केदारनाथ के कपाट बंद किये जाते हैं.

केदारनाथ धाम के कपाट खुलते समय कई विशेष और पारंपरिक पूजा-अर्चना की जाती हैं, जो सदियों से चली आ रही हैं. कपाट खुलने की प्रक्रिया बेहद पवित्र और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न होती है.

नंदी के कान में अपनी मनोकामना कहते सीएम धामी (Etv Bharat)
पंचमुखी डोली की पूजा: शीतकालीन प्रवास (ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ) से बाबा केदार की पंचमुखी चल उत्सव विग्रह डोली के केदारनाथ धाम पहुंचने पर विशेष पूजा और आरती की जाती है.

हवन और अभिषेक: मंदिर के मुख्य पुजारी (रावल) और अन्य पुजारियों द्वारा कपाट खुलने के शुभ मुहूर्त पर विधिवत हवन, यज्ञ और अभिषेक किया जाता है.

वैदिक मंत्रोच्चारण: कपाट खुलने के समय रावल और हक-हकूकधारियों की मौजूदगी में वैदिक मंत्रोच्चार और शंख ध्वनि के साथ मंदिर के द्वार खोले जाते हैं.

विशेष आरती: कपाट खुलने के बाद बाबा केदार की पहली आरती की जाती है, जिसमें सैकड़ों भक्त शामिल होते हैं.

भोगा और प्रसाद: कपाट खुलने के बाद बाबा केदार को पहला भोग लगाया जाता है और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया जाता है.

केदारनाथ धाम में भगवान शिव की पूजा होती है. यह भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. यहां शिवजी को ‘केदारेश्वर’ के रूप में पूजा जाता है और मुख्य मंदिर में एक त्रिकोणीय शिवलिंग (बैल की पीठ का कूबड़) की पूजा की जाती है.

आपदा के बाद बदली तस्वीर: 2013 केदारनाथ आपदा ने केदारनाथ धाम और आसपास के क्षेत्र को गहरा आघात पहुंचाया था. भारी तबाही के बाद जहां एक ओर यात्रा को लेकर आशंकाएं थीं, वहीं दूसरी ओर पुनर्निर्माण और व्यवस्थाओं में व्यापक सुधार ने इस तीर्थ को नए आयाम दिए. आधुनिक सुविधाओं, बेहतर सड़क और पैदल मार्ग, हेलीकॉप्टर सेवाओं और सुरक्षा व्यवस्थाओं के चलते आज यात्रा पहले से कहीं अधिक सुगम और सुरक्षित हो गई है.

हर साल बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या: आपदा के बाद जहां यात्रा पर असर पड़ा था, वहीं अब हर साल श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है. लाखों की संख्या में भक्त बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. सरकार और प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं के चलते यात्रा का स्वरूप अधिक संगठित और व्यवस्थित हुआ है.

आस्था के साथ आर्थिक मजबूती: केदारनाथ यात्रा अब केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी बन चुकी है. हर साल रिकॉर्ड संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालुओं के कारण स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं और क्षेत्रीय पर्यटन को नई ऊंचाइयों मिली हैं.

6 माह ‘नर’ तो 6 माह ‘देव’ पूजा का विधान: केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही धार्मिक परंपराओं का एक अनूठा क्रम शुरू हो जाता है. मान्यता है कि यहां वर्ष के छह माह ‘नर पूजा’ और शेष छह माह ‘देव पूजा’ का विधान है. कपाट खुलने के बाद अगले छह महीनों तक मंदिर में पूजा-अर्चना मनुष्यों यानी ‘नर’ द्वारा की जाती है. इस दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा करते हैं और बाबा केदार का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.

वहीं शीतकाल में कपाट बंद होने के बाद यह मान्यता है कि देवता स्वयं यहां ‘देव पूजा’ करते हैं. इस अवधि में केदारनाथ धाम मानव गतिविधियों से विरक्त रहता है और पूजा का आध्यात्मिक क्रम देव शक्तियों द्वारा संचालित माना जाता है. यह परंपरा केदारनाथ धाम की विशेष धार्मिक पहचान है, जो इसे अन्य तीर्थ स्थलों से अलग बनाती है. कपाट खुलने के साथ ही शुरू होने वाली ‘नर पूजा’ का यह छह माह का काल श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है.

भुकुंट भैरव, केदारपुरी के क्षेत्ररक्षक: केदारनाथ धाम में भुकुंट भैरव की भी विशेष मान्यता है. धार्मिक परंपराओं के अनुसार भुकुंट भैरव को केदारपुरी का रक्षक देवता माना जाता है, जो पूरे क्षेत्र की निगरानी करते हैं और धाम की रक्षा करते हैं. मान्यता है कि जब शीतकाल में केदारनाथ धाम के कपाट बंद हो जाते हैं और पूरा क्षेत्र बर्फ से ढक जाता है, तब भी भुकुंट भैरव यहां विराजमान रहते हैं और केदारपुरी की रक्षा करते हैं. इस दौरान भगवान शिव के धाम की सुरक्षा की जिम्मेदारी इन्हीं पर होती है.

कपाट खुलने के बाद श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन से पहले या बाद में भुकुंट भैरव के मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना करते हैं. ऐसा माना जाता है कि भैरव बाबा के दर्शन किए बिना केदारनाथ यात्रा पूर्ण नहीं मानी जाती. स्थानीय पुजारियों के अनुसार भुकुंट भैरव की कृपा से ही केदारपुरी हर संकट से सुरक्षित रहती है. यही कारण है कि श्रद्धालुओं में इनके प्रति गहरी आस्था देखने को मिलती है.

कल खुलेंगे बदरीनाथ के कपाट: उत्तराखंड की चारधाम यात्रा 19 अप्रैल से शुरू हो चुकी है. उस दिन गंगोत्री और यमुनोत्री धामों के कपाट खुले थे. आज केदारनाथ के कपाट खुलने के सात ही केदारनाथ यात्रा भी शुरू हो गई है. कल गुरुवार को बदरीनाथ धाम के कपाट खुलेंगे. इसके साथ ही चारधाम यात्रा पूरी तरह शुरू हो जाएगी.

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