उपेक्षा की शिकार खैरागढ़ राजपरिवार की विरासत, समाधि स्थल बना नशेड़ियों का अड्डा
ऐतिहासिक स्थल में कर रहे शौच

खैरागढ़ : इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय का नाम पूरे विश्व में प्रसिद्ध है. खैरागढ़ राजपरिवार ने भारत को कला,संस्कृति और संगीत से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. रियासत के राजाओं ने विश्वविद्यालय की प्रगति के लिए अपनी विरासत को देश के नाम किया है.लेकिन आज उन्हीं राजाओं की याद में बनीं स्मृतियां उपेक्षा और बदहाली का शिकार है. खैरागढ़ के इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और गौरव का प्रतीक माने जाने वाले समाधि स्थल को देखने के बाद कोई ये नहीं कहेगा कि जिनकी याद में इन्हें बनाया गया है वो कितने महान थे.
असामाजिक तत्वों का अड्डा बना समाधि स्थल
खैरागढ़ राजपरिवार के जिन राजाओं ने अपनी विरासत को आने वाले कल के लिए जिम्मेदारों को सौंपा था,उन जिम्मेदारों ने अपना कर्तव्य ठीक से नहीं निभाया.जिस समाधि स्थल को देखने के बाद लोगों को ये जानने की ललक होनी चाहिए थी कि ये कौन थे, वो धीरे-धीरे गुमनाम हो रहे हैं. समाधि स्थल के चारों ओर घनी झाड़ियां उग चुकी हैं.साफ सफाई नहीं होने से लोग इस जगह का इस्तेमाल कूड़ा फेंकने के लिए करते हैं. वहीं शाम ढलते ही समाधि स्थल पर नशेड़ियों का जमावड़ा हो जाता है. शराब की खाली बोतलें और गुटखा पानी के पाउच इस जगह की गरिमा को तार-तार कर रहे हैं.
समाधि स्थल बना नशेड़ियों का अड्डा (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
राजाओं ने विश्वविद्यालय के लिए दिया दान
खैरागढ़ के राजाओं ने अपने महल को दान देकर इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय जैसी विख्यात संस्था की स्थापना में अहम भूमिका निभाई थी.आपको बता दें कि खैरागढ़ विश्वविद्यालय से पढ़कर कई नामी लोगों ने अपने साथ देश का नाम रौशन किया है. लेकिन जिन राजाओं ने भारत की कला संस्कृति को जीवित रखने के लिए अपना महल दान दिया,आज उन्हीं राजाओं की याद में बने समाधि स्थल अव्यवस्था और गंदगी के भेंट चढ़ रहे हैं.
responsibility of the mausoleum
राजपरिवार के पास ही समाधि की जिम्मेदारी (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
यूरीनल प्वाइंट बना समाधि स्थल
जिस समाधि स्थल पर लोगों को इतिहास बताने वाली तख्तियां लगी होनी चाहिए थी, दुर्भाग्यवश वो अब मूत्रालय स्थल बन चुका है. लोग जहां चाहे अपनी सुविधानुसार बिना किसी रोकटोक के मूत्र विसर्जन करने के लिए फ्री हैं. ना तो कोई रोकने वाला है और ना ही कोई टोकने वाला. तड़के सुबह समाधि स्थल की झाड़ियों के बीच लोग स्वच्छता अभियान का मखौल उड़ाते लोटा लिए भी आसानी से देखे जा सकते हैं. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई बार इस विषय को प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के संज्ञान में लाया गया, लेकिन आज तक कोई ठोस पहल नहीं हुई.
ना तो स्थानीय प्रशासन की ओर से नियमित साफ सफाई की व्यवस्था की जा रही है और ना ही राजपरिवार की ओर से संरक्षण के प्रयास नजर आते हैं. देखरेख के अभाव में समाधि स्थल धीरे-धीरे कचरा स्थल और शौचालय में तब्दील हो चुका है- देवेंद्र सिंह स्थानीय नागरिक
इतिहासकारों और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि समय रहते इस ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण और सौंदर्यीकरण की योजना नहीं बनाई गई, तो आने वाली पीढ़ियां खैरागढ़ की समृद्ध विरासत से वंचित हो जाएंगी.
समाधि स्थल को लेकर प्रशासन का रवैया उदासीन दिख रहा है.कुछ दिनों पहले सामाजिक संस्था ने स्थल की सफाई की थी. समाधि स्थल विश्वविद्यालय के पास होने के कारण प्रबंधन को भी चाहिए कि छात्रों के जरिए पुरातन स्थल की साफ सफाई समय-समय पर करवाएं.नामी लोगों की समाधि स्थल आज भी इतिहास बताने के लिए वहां पर हैं.लेकिन यदि साफ सफाई नहीं हुई तो इतिहास मिट्टी में मिल जाएगा – भागवत शरण सिंह, स्थानीय जानकार
किसकी जिम्मे है समाधि स्थल
आपको जानकर हैरानी होगी कि ये समाधि स्थल ना तो नगर पालिका की संपत्ति है और ना ही इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के अधीन.आज भी ये स्थल खैरागढ़ राजपरिवार की निजी संपत्ति है.इसलिए इसके देखरेख की सारी जिम्मेदारी राजपरिवार की ही है. लेकिन राजपरिवार ने अपने पुरखों की विरासत को बदहाल होने के लिए छोड़ रखा है. आज इस समाधि स्थल को एक नजर देखने तक की जहमत किसी भी राज परिवार के सदस्य ने नहीं उठाई है. ऐसे में ये कहना गलत ना होगा कि राजसी शान को अपने जमाने में बढ़ाने वालों की पीढ़ियां उनकी स्मृतियों को गुमनामी के अंधेरे में ढकेल रही हैं.
सांस्कृतिक छवि बचाने वाला स्थल उपेक्षा का शिकार
समाधि स्थल का जिस तरह का हाल है,उसे देखने के बाद खैरागढ़ के स्थानीय निवासी मन ही मन अफसोस करते हैं. उनके मन में अक्सर ये ख्याल आता है कि शहर की सांस्कृतिक छवि को बचाने वाले धरोहर आज उपेक्षित हैं. अब सभी के सामने बड़ा सवाल ये है कि क्या आने वाले दिनों में समाधि स्थलों की सुध प्रशासन या प्रबंधन लेगा कि नहीं. यदि सुध लेकर इसकी साफ सफाई की जाए तो ये स्थल आने वाली पीढ़ियों को इतिहास की स्मृतियों को दिखाने का प्रयास करेगा.लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ तो समाधि स्थल को लोग कूड़ा घर, शौच स्थल और अड्डेबाजी की जगह के तौर पर ही जानेंगे.



